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फौजी की जान/Sad poem

 मेरी त ज़िन्दगी -ए

बॉर्डर प जान खातर बनी स
दुश्मन न मौत के घाट उतारन खातर बनी  स ।

वा माँ चावे थी मन छोड़ मत जाइए तू,
मेरी आँख का तारा स तू ,
आफिस म बैठ काम करिये,
मने अपनी जान त प्यारा से तू ।

मेरी त - - - - - - - - - - -- - - -- - खातर बनी स।



उस मा न ला तिलक,
समझा के अपने दिल न,
भेज दिया बॉर्डर प ।

उस मा के आंखा के आंसू भी न रुके थे,
अर दुष्मनां की गोली सीने न चलनी करके पार  होगी,
मेरी त - - - - - - - - -- - - - -- - - - - -खातर बनी स।

ज दिन तिरंगे म लिपटा आऊंगा,
उन तोपां की सलामी खाउंगा
दुष्मनां न बॉर्डर प मार गिरा के ,
अपने नाम आगे अमर जवान लिखवाऊंगा,
उस दिन सैनिक कहलाऊंगा।
मेरी त - - - - - -- - - - - - - - - - -खातर बनी स।

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