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मौत के इतने करीब/Sad poem

मौत के इतने करीब  थे,
फिर भी आंखों मे खुशी के आँशु की छलक थी,

हमारी सांसे थम रही थी,
हमारा शरीर हमे छोड़ रहा था।

कभी मौत के नाम से भी डरते थे,
आज ख़ुशी-ख़ुशी गले लगा रहे थे।

इस मौत की नींद मे चैन का सुकून था,
क्योंकि हमारा सिर हमारी जान की गोद में था।

हमारी साँसे टूट रही थी,
उनका साथ छूट रहा था।

ज़िन्दगी ने साथ छोड़ दिया,
हमे उनसे दूर कर दिया।

ज़िन्दगी के हर सफर मे साथ थे,
मेरी जान हमेशा मेरे पास थे।

ये मौत हमे उनसे दूर न ले जा सकी,
जितने हम करीब थे उतना किसी और को ना ला सकी।

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