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छाई बरखा बहार/Love poem

 आसमान मे बादल छाए,

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धीरे-धीरे बरखा लाए,
बरखा की बूंदे,
बच्चों को बहुत लुभाए,
धीरे-धीरे सब मस्ती मे आए।
आसमान- - - - - - लाए।

मुरझाए फूल-पतो मे,
जान आ गई,
धीरे-धीरे आसमान मे ,
बरखा छा गई।
आसमान- - - - - - - - - लाए।

पशु-पक्षियों का कलरव छा गया,
धीरे-धीरे मोर नाचने आ गया,
वातावरण मे हरियाली छाई,
धीरे-धीरे तीज भी ,
अपने घर से निकल आई।
आसमान - - - - - - - - - लाए।

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